Dhanteras 2025: शुभ योग में धनतेरस, जानें खरीदारी का मुहूर्त, पूजा विधि की जानकारी

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धनतेरस (Dhanteras 2025) पर केवल खरीदारी नहीं करनी है। धनतेरस पर पूजा उपासना भी करना है क्योंकि यहीं से दीपावली का आरंभ हो रहा है। 

कैसे पूजा उपासना करेंगे? 

संध्या काल में अपने घर की उत्तर दिशा की तरफ नॉर्थ डायरेक्शन में कुबेर देव और धनवंतरी भगवान की स्थापना करिए। उनका चित्र या उनकी मूर्ति ला कर रखिएगा। दोनों के सामने अलग-अलग एक मुख का घी का दीपक जलाइएगा। कुबेर देव को सफेद मिठाई और धनवंतरी भगवान को पीली मिठाई चढ़ाएंगे। पहले कुबेर देवता के मंत्र का जप करेंगे। ओम ह्रीम कुबेराय नमः। ओम ह्रीम कुबेराय नमः इस मंत्र का जप करेंगे। फिर धनवंतरी स्तोत्र का पाठ करेंगे। 

इसके बाद कुबेर देव से धन की प्रार्थना करेंगे और धनवंतरी भगवान से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करेंगे। प्रसाद ग्रहण करेंगे और जहां पर उनका चित्र या उनकी मूर्ति रखी थी दीपावली की पूजा हो जाने तक यह वहीं रहेगी। दीपावली के बाद पूजा के बाद कुबेर देवता को धन स्थान पर और धनवंतरी को पूजा के स्थान पर स्थापित कर देंगे। तो कुल मिला कर केवल कुबेर की पूजा मत करिएगा। कुबेर देव की पूजा अच्छा है। जरूर करिए। धन का लाभ उससे जरूर होता है। लेकिन साथ में धनवंतरी भगवान की पूजा भी करिएगा। धनवंतरी स्तोत्र आपको बड़े आराम से पुस्तकों में मिल जाएगा। इंटरनेट पर मिल जाएगा। धनवंतरी स्तोत्र का पाठ करिएगा और अपने और अपने पूरे परिवार के लिए अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करिएगा। 

धनतेरस पर पूजा का मुहूर्त क्या है? खरीदारी कब करें?

इस बार त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 पर आरंभ होगी। 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 से आरंभ होगी। इसीलिए सारी खरीददारी आपको त्रयोदशी में करनी है। सारी खरीदारी दोपहर 12:18 के बाद ही करिएगा। कोई भी खरीददारी राहु काल में नहीं करते हैं। लेकिन इस बार मामला यह है कि 18 अक्टूबर को शनिवार है। राहु काल सुबह 9:00 से 10:30 का होता है। वह पहले ही खत्म हो चुका होगा। तो कोई परेशानी नहीं है। 

दोपहर 12 18 के बाद आप खरीदारी और पूजा करें। वैसे खरीदारी करने का और पूजा करने का सबसे बढ़िया जो समय है वह है शाम को 7:15 से रात के 9:10 के बीच में।आप खरीदारी तो कभी भी कर लीजिएगा दोपहर 12:18 के बाद। लेकिन जो धनतेरस की पूजा है वो शाम को 7:15 से रात के 9:10 के बीच में करिएगा। आपकी पूजा निश्चित रूप से सफल होगी। 

बहुत सारी चीजों को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं।पहले जमाने में जब शाम को घर में लाइट जलाते थे तो घर के बड़े बुजुर्ग नमस्कार करते थे। यानी दीपक को प्रकाश को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। घर की स्त्रियों को बालिकाओं को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। घर की झाड़ू को भी लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। अगर पैर से झाड़ू लग जाए तो लोग नमस्कार करते भगवान से क्षमा मांगते हैं। झाड़ू वास्तव में सफाई का प्रतीक है और साथ ही साथ संपन्नता का प्रतीक है। आपके अच्छे स्वास्थ्य और संपन्नता के लिए आप अपने घर में सफाई तो हमेशा रखते ही हैं और वो करते हैं झाड़ू से। 

तो धनतेरस के दिन एक नई झाड़ू आप खरीद कर ला सकते हैं। सीक वाली हो या फूल वाली हो जैसी भी हो एक झाड़ू खरीद के धनतेरस पर लाएं। पूजा स्थान पे जहां आप नए-नए सामान ला के रख रहे हैं पूजा करने के लिए वहां झाड़ू को भी रख दें। दीपावली पर सब सामान पर तिलक लगाएंगे ना नए सामान पे तो झाड़ू पर भी लगाइएगा और इसके बाद अगले दिन से उस झाड़ू का प्रयोग करिएगा घर में साफ सफाई के लिए तो ऐसा करने से माना जाता है जो सबसे बड़ी बात कि घर में किसी तरह की नजर नहीं आती है। किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। साल भर स्वास्थ्य और संपन्नता बनी रहती है।

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मैंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। मैं पत्रकारिता में आने वाले समय में अच्छे प्रदर्शन और कार्य अनुभव की आशा कर रही हूं। मैंने अपने जीवन में काम करते हुए देश के निचले स्तर को गहराई से जाना है। जिसके चलते मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार बनने की इच्छा रखती हूं।